
नवजात बच्चों के विकास के लिए शुरुआती 1,000 दिन काफी अहम होते हैं। इसे देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े कई सर्वे संचालित किए जाते हैं, ताकि उनकी बेहतरी के लिए उचित उपाय किया जा सके। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)-4 के अनुसार, भारत में कुपोषण की दर अधिक है। कुपोषण में वजन कम होना (36 प्रतिशत), उम्र के हिसाब से ऊंचाई नहीं बढ़ना (38 प्रतिशत), ऊंचाई के अनुपात में वजन कम होना (21 फीसदी) जैसे मामले 5 साल से कम उम्र के बच्चों में पाए जाते हैं। चिकित्सकों और विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण से बचाव के लिए दो बातें सबसे अहम हैं, पहला- बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग कराना और दूसरा- उन्हें समुचित और सही तरीके का पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना।
इसके लिए भारत सरकार ने 2018 में पोषण अभियान शुरू किया था। इसका मकसद बच्चों पर शुरुआती 1,000 दिनों के दौरान अधिक ध्यान देना था। इस अभियान में दो बातों पर मूलत: ध्यान दिया गया- शुरुआती छह महीनों तक ब्रेस्टफीडिंग और फिर दो साल तक समुचित ब्रेस्टफीडिंग। छह माह के बाद ब्रेस्टफीडिंग ही सिर्फ पोषण की जरूरतों को पूरा नहीं करती है। इसके साथ बेहतर खान-पान की भी जरूरत होती है। साथ ही यह भी ध्यान रखने की आवश्यकता है कि खान-पान शुरू होने के बाद ब्रेस्टफीडिंग को न रोका जाए। ब्रेस्टफीडिंग को दो साल या इससे अधिक तक जारी रखा जाने के लिए कहा गया। इसी तरह, बच्चों को दिया जाने वाला आहार काफी हल्का और पूरी तरह पका होना चाहिए। Read More…